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Explainer: तेहरान की सड़कों पर बंदूकें क्यों बांट रहा है ईरान? आम लोगों के हाथों में थमा दी है AK-47

 Published : May 22, 2026 08:32 am IST,  Updated : May 22, 2026 08:34 am IST

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेहरान में आम नागरिकों को AK-47 चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। माना जा रहा है कि ईरान सार्वजनिक रूप से मिसाइलों और हथियारों का प्रदर्शन कर ताकत दिखाना चाहता है। सरकार ‘जांफदा’ कैंपेन के जरिए लोगों को देश के लिए जान देने के लिए तैयार कर रही है।

ईरान में महिलाओं को भी...- India TV Hindi
ईरान में महिलाओं को भी बंदूक चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। Image Source : AP

Iran US Tensions: ईरान की राजधानी तेहरान में इन दिनों एक अलग तरह का माहौल देखने को मिल रहा है। सड़कों पर सेना की गाड़ियां दिखाई दे रही हैं, लोगों को खुलेआम बंदूक चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है और सार्वजनिक कार्यक्रमों में मिसाइलों का प्रदर्शन किया जा रहा है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान अब अपने नागरिकों और दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि अगर बातचीत विफल हुई और ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ा, तो जंग दोबारा शुरू हो सकती है।

तेहरान की सड़कों पर क्या हो रहा है?

अब ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के सदस्य आम लोगों को खुलेआम कलाश्निकोव जैसी असॉल्ट राइफल चलाना सिखा रहे हैं। शहर में निकलने वाली परेड में सेना की गाड़ियों पर सोवियत दौर की भारी मशीनगनें लगाई जा रही हैं। यहां तक कि एक सामूहिक विवाह समारोह के मंच पर बैलिस्टिक मिसाइल भी सजाई गई थी। बताया गया कि इसी तरह की मिसाइल का इस्तेमाल पहले इजरायल पर क्लस्टर हथियार गिराने में किया गया था। ईरान के इस कदम को सिर्फ सैन्य प्रदर्शन नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

आखिर ईरान ऐसा क्यों कर रहा है?

अब सवाल उठता है कि आखिर ईरान ऐसा कर क्यों रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे कई कारण हैं:

  1. अमेरिका को जवाब देना: अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वह ईरान के यूरेनियम भंडार पर ताकत का इस्तेमाल करके कब्जा कर सकता है। ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि उन्होंने कुर्द लड़ाकों को हथियार भेजे थे, ताकि वे सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की मदद कर सकें। ऐसे में ईरान अपनी ताकत दिखाकर अमेरिका को चेतावनी देना चाहता है।
  2. देश के भीतर लोगों का मनोबल बढ़ाना: जंग की वजह से ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरियां जा रही हैं, कारोबार बंद हो रहे हैं और खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ दवाइयों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे माहौल में सरकार हथियारों के प्रदर्शन के जरिए समर्थकों का मनोबल बनाए रखना चाहती है।
  3. विरोध प्रदर्शनों को रोकना: ईरान में इसी साल जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई हुई थी। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, इस कार्रवाई में 7000 से ज्यादा लोग मारे गए और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया। विश्लेषकों का मानना है कि अगर ज्यादा कट्टर समर्थकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी, तो भविष्य में होने वाले विरोध प्रदर्शनों को दबाना सरकार के लिए आसान हो सकता है।

लोगों को कैसे तैयार किया जा रहा है?

ईरान सरकार और सरकारी मीडिया लगातार लोगों से 'जांफदा' कैंपेन में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। 'जांफदा' का मतलब होता है 'वे लोग जो अपनी जान कुर्बान करने को तैयार हैं'। सरकारी टीवी चैनलों और मोबाइल संदेशों के जरिए लोगों से देश के लिए कुर्बान हो जाने की अपील की जा रही है। सरकार का दावा है कि करीब 3 करोड़ लोगों ने ऑनलाइन फॉर्म या सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए इस कैंपेन में शामिल होने की इच्छा जताई है। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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Image Source : APतेहरान में एक सामूहिक विवाह समारोह के मंच पर बैलिस्टिक मिसाइल देखने को मिली।

बच्चों को भी शामिल करने पर विवाद

कुछ कट्टरपंथी समूहों ने परिवारों से कहा था कि वे 12 साल तक के लड़कों को रिवोल्यूशनरी गार्ड के पास भेजें, ताकि वे चेकपोस्ट पर काम कर सकें। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसकी कड़ी आलोचना की है और इसे 'युद्ध अपराध' तक बताया है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता शिरीन एबादी ने भी बच्चों को हथियार पकड़ाने वाली तस्वीरों की आलोचना की है। उन्होंने कहा, 'ऐसे दृश्य नाइजीरिया के बोको हराम और सूडान-कांगो की मिलिशिया समूहों की याद दिलाते हैं, जहां बच्चों को हथियार दिए जाते हैं।'

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Image Source : APरिवोल्यूशनरी गार्ड बच्चों तक को हथियारों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

हथियारों की ट्रेनिंग में क्या हो रहा है?

तेहरान में आयोजित एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में पुरुषों और महिलाओं की अलग-अलग क्लास लगाई गईं। रिवोल्यूशनरी गार्ड की स्वयंसेवी बसीज फोर्स के सदस्य हादी खुशेह ने लोगों को फोल्डिंग-स्टॉक कलाश्निकोव राइफल चलाना सिखाया। उन्होंने कहा, 'ट्रेनिंग पूरी करने वालों को ‘जांफदा’ कार्ड दिया जाएगा। इससे साबित होगा कि उन्हें इस हथियार की शुरुआती ट्रेनिंग मिल चुकी है और जरूरत पड़ने पर वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।' हालांकि, कई लोग हथियार संभालने में पूरी तरह अनाड़ी दिखे। एक युवक राइफल की मैगजीन तक ठीक से नहीं लगा पाया और गलती से बंदूक का मुंह दूसरों की तरफ कर दिया।

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Image Source : APईरान में अधिकांश आम लोग सरकार के साथ खड़े दिख रहे हैं।

इस कदम पर आम लोगों की क्या सोच है?

ईरान में अधिकांश आम लोग इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़े दिख रहे हैं। तेहरान में रहने वाले 47 साल के अली मोफिदी ने कहा कि मौजूदा हालात में हर व्यक्ति को हथियार चलाना आना चाहिए। उन्होंने कहा,

'हम इस समय युद्ध जैसी स्थिति में हैं। जरूरत पड़ने पर हर व्यक्ति तैयार होना चाहिए और उसे बंदूक चलानी आनी चाहिए।' अमेरिका को लेकर उन्होंने कहा, 'अगर वे समुद्र या जमीन किसी भी रास्ते से आएंगे, तो हम अपने झंडे के साथ खड़े रहेंगे और अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं छोड़ेंगे।'

क्या ईरान युद्ध की तैयारी कर रहा है?

फिलहाल ईरान ने किसी बड़े सैन्य अभियान की घोषणा नहीं की है, लेकिन जिस तरह सार्वजनिक जगहों पर हथियारों का प्रदर्शन बढ़ा है, उससे साफ है कि सरकार देश के भीतर और बाहर दोनों जगह ताकत का संदेश देना चाहती है। यह रणनीति एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी देने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ देश के भीतर सरकार समर्थकों को संगठित रखने का प्रयास भी है। अब काफी कुछ अमेरिका और ईरान के बीच जारी समझौते की कोशिशों के नतीजों पर निर्भर करेगा।

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